سعدي
| عطيـــه اي ست شکــوهنــده وگــــرانمقدار | سـخن به نـــــزد گــــرانقـدرمـــردم هوشيار | |
| ســخن عـــزيـــزتـــرآمـد زگـوهـــرشهــوار | بــه پــيشگـــــاه خــردمنـد مـــرد دريــــا دل | |
| کــه گشــت بـهـــرۀ انســان زدرگــــه دادار | سـخن عَـطّيـــــۀ والاي عـــــالـم بـــــالاست | |
| نــــه مخــزن گـهـــــروگنـج درهــم و دينار | سـخن بمــــانـَـد وگنـجينـــۀ کمــــــال ازمرد | |
| بســا لآلــي رخشــــــان کــــه آورد بـه کنار | بــه بحـر فکـــر سخنــورچوغوطه ورگردد | |
| رسد دقــــايـق طبـــع وخيـــــال اوبــه هزار | بــه يک دقيقـه که شــاعرشود دقيق به فکر | |
| کــه جـــــاودانـــه همــي زنــده داردش آثار | نميــرد آنکــه ز کـلکـش بـه جــاي مـاند اثر | |
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| نتــافت اختـــــرسعــــدي چنــوبـه هيچ ديار | بـه ويـژه«سعدي شيراز» آنکه درنـُه چرخ | |
| کــه گشــت گفـتــــۀ او وردِ ثــــابت و سيار | بــلنـد پـــــايه ســخن آفــريـــن گــــردون فر | |
| کــه پيکـــــرهنــــــرازشعـــراوگرفت شعار | همــــان خجستـــه سيـــَرشاعرفضيلت کيش | |
| زلــوح خـــاطـــرغمديــدگــــان ستــردغبار | همـــان کـه باسـخن خوش به رهگذارحيات | |
| طـنيــــن شهــــــرت او، زيــــرگـنبـــد دوّار | سپهـــرمـرتبــه گوينــــده اي که نـيـک افتاد | |
| به راه فضـل، بـــرانگيخت مــرکب رهوار | بــه شهـــرعلـم، بــرافــراشت رايت تسخير | |
| ز حســن خلــق بپيــراست شـاخ علم ازخار | زلطف طبــع بيـــاراست بـــاغ فضل ازگل | |
| بــه فکـــــربکــــرزدل بـــــرد اَنــدُه وتيمار | زشعـرنغـز، بـه جان داد قوت راحت بخش | |
| زشــاخ فکــــرچه آورده رنگ رنگ اثمار | بــه بـاغ طبع چه پرورده گونه گون ريحان | |
| کــلام اوچـه کــلامي بـديـــع و شـکـــــربار | بيــان اوچه بيــــاني لطيــف و شهـــد آميــز | |
| کــلام اوهمـــه راحت فـــزاي وبهجــت يار | بيــان اوهمــــه خــــاطـرنـوازوشـــورانگيز | |
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| کــلام اوست دل انگيــــزتـــرزبـــــــاد بهار | بيــان اوست گهـــــربــــارتــــرزابـــرمَطير | |
| شمــامـۀ قـلمـش بي گمـــــان چومشکِ تتار | لطــافت سـخنـش في المثــل چـوديـبــهِ روم | |
| زشعـــــراوست شعــــــار فصـــاحت گفتار | زنــظـــــم اوسـت نـظـــــام بــــلاغت تقرير | |
| شــود رمــوز فصــــاحت ز نثـــــراواظهار | بــود کـنـــوزبــلاغت بـه نـظــــم او مکنون | |
| زنـظم ونثـــــرهمـوريخت پــــايه اي ستوار | بــه کلک وطبــــع همــوداد مـايه اي افزون | |
| کـنــد نکــــوهش کــــــردارزشت وناهنجار | کند ستـــايـش رفتـــارنـيــک وخيـــــراندوز | |
| زتــــازيــــانه گـفـتـــــــار، شـيــــــوۀ رفتار | بــه طبـــع تــوسن ِگــردنکشان ِدهرآموخت | |
| گــزارش قلمـش چـون بــه جشـن بهمن نار | فــروزش سخنـش چـون به تيه ظلمت، نور | |
| لطــــايفـش بــه مثــل نـــرمتـــرزگــونۀ يار | قصـايـدش همـگــي گـــرمتــرزبـوسه عشق | |
| بــه حکــم ذوق سـليـــم و قــريحــۀ سرشار | ســـرود بـس غـــزل نـغــــزو قطعۀ پرشور | |
| ظــرافت مثــلش بــي بـــدل چوچـهـــرنگار | لطــافت غـــزلش في المثـل چو چشم غزال | |
| بود زلطف و صفـــا رشک صفحــۀ گلزار | چگـويمـت زگـلستـــــان اوکـه هـــــرورقش | |
| کــه پــايــدارزِيــَد چـون گـل هميشــــه بهار | خـــزان دهـــــرنبـــــايد به«بوستـانش» راه | |
| کــه مشکبـــوي تــــرآمــد زطـبـلــــۀ عطار | بــه«طيـبـــــاتـش»اگـــــــرروي آوري بيني | |
| بـدايـعـش همــــــه نقـــــد خـواص را معيار | نـصــايحش هـمــــه قـلـب عــــوام را اکسير | |
| کنـد زمـــانـه بـه پـــــايـنـدگيـش نيک اقرار | بــه هفت قــرن که رفت اززمـان او امروز | |
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| کــه جملــــه محــوشــد انــــدرتحــوّل ِادوار | بســا بـــُروج مُشـيــِّد، بـــه مـــاه برشده بود | |
| کــه شد خــراب وتهي گــشت زآدمي ناچار | بســا ولايـت آبــــــــاد و کـشـــــــور معمور | |
| بــه خـــاک تيــــره مبــدّل نمــــود زرّ عيار | بســا منــابع ثــروت که روزگـــــارش زود | |
| بســا توانگـــــروشـــــاه واتـــابـک وسردار | بـيـــــــامـدنـد وبــــرفـتـنــد وهـيـچ نـنـهـادند | |
| وليک کــــــرم لحـد خورد پـودشــان بـا تار | چــوکـــــرم ِپـيــله تنيدنــد تـارعُلقــه به دهر | |
| وليک خــوار بـخفتنـــد زيــــر ِسنـگ مزار | زسنگ ِخـــاره بــرافــراشتند طُرفه قصور | |
| نــه جـــام مــاند ازآنـــان نه چهــــــرۀ گلنار | نــه نــام مــانـد ازآنــان نـه يــادگـــار جميل | |
| بــه خـاک تيــــــره نبـردند غيرنکبت وعار | ززرّ ِســـــرخ نـجـستنــد غيـــرخفّت وننگ | |
| گـــرانبـــها وگــــرانـمـــــايه وگـــــرانمقدار | ولي زگـفتـــۀ«سعدي» بســــا گهــرباقيست | |
| زشعـــــردلـکش اوينــد جملـــه بــرخوردار | به هرکه بنگري ازخاص وعام وپيروجوان | |
| بــه صيقــل سخنــــانـش زلـــوح دل زنگار | بســا کســا کـه بـه محنتســـراي دهر، زدود | |
| جمــــال عشـق و عفــــاف و شمــايل دلدار | بســا کســا کـه در آيـيـنــــۀ کــــــلامـش ديد | |
| هــرآنـچـــه گفتـــــۀ اوبـيـشتـــرشـود تکرار | حـــلاوت سـخـنـش بـيـشتــــــرشـــود معلوم | |
| خجستـــــه منـشـــــا آثــــــارومطلــــع انوار | خوشــا بـه خطّــۀ فــرخنــده اختر«شيراز» | |
| ســزد که فخـــــرکنـد بر ممالک وامصار1 | ازآن سبب که درويــــافت پــرورش سعدي |
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کنون زکلک سخندان ِحقگزار، «اديب» |
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بـــرآستــانۀ«سعدي» شداين چکـامه نثار |
| 1 - امصار: جمع مصر به معني شهر ها. |