نام دوستي بهرام
| اين قصيده كه محض تفنن با الف اشباع سروده شده است در بهمن ماه 1372 انجام گرفت. |
| كــي دهــــــد تــن بـــه ننــگ دشنـاما؟ | هــــــركــــه را فـَــــرّهيـست بـــا نـاما | |
| مـــــــردن از آن بـــه است بـــــا نــاما | زنــــدگي گــــرقـــــرين بـــود با ننگ | |
| كــــــآدمي راست بـــــرتـــــرين كــاما | درجهــــــان، بـِـه زســرفرازي نيست | |
| درهـم آويــــــز و خــوش بــزن جــاما | كـــــــامـــرانيّ و نـــــــامــــــداري را | |
| فخــــر ِ مــــــرد خجستـــــه فـــرجـاما | نـــــام و حــيثــّيت وشــــرف بــــــاشد | |
| آفــــــريــن بـــــــــر روان ِ بهــــــراما | در ره پــــــــــاس فـــــرّ ونـــام ونشان | |
| آن بــــه كــــــوپال و يــال چون سـاما | پــــــــور ِ « گــــــودرز» آن دلاور ِ يل | |
| هــمتــش هــمچــو غيــــــــرتش تــاما! | پهــلواني غيــــــور و نـــــام پــــرست | |
| بـــود هــمچــون دمنــده ضــرغــــاما1 | جنگ را بــــــا يــــــــلان ِ تــــــوراني | |
| بــــرق تــيغش سفيـــــر ِ ســــــرســاما | در نبـــــــردي خــــروشنـاك چو رعد | |
| آنچــــه بــــــودش بـــه عهـــده از واما | بـــــا شهــــامت بـه بــوم وبر پرداخت | |
| تــيـــــــره شب بـــــــود و گـــاه ِ آراما | چــونكه بــــر گشت ســوي لشگــرگاه | |
| كــــه بــــــــرام نــقش كـــرده بُـد ناما | ديــد گم كــــــرده تـــــازيــــانة خويش | |
| ســـــــوي آن عــــــرصه، نـــابهنگاما | پس بـــــرآشفت و خواست بــــرگشتن | |
| دستــفـــــــرســـــــــــوده اش در ايّــاما | تـــا مبــــــــادا بـــه چــنگ خصـم افتد | |
| تـــــــا نتـــــــازد بـــه جـــــــانش آلاما | تــــا نيـــــــــابــد بــــه ريـــشخنـد آزار | |
| در بــــــــــــر خصــم و نــــــزدِ اقواما | نــــشكنــد تـــــا غــــــرور ســربازيش | |
| نــــــاگـــــزيــــــر از فشـــــار ِ اوهاما | جـــــانب پهنــــۀ عـــــزم رفتــن كــرد | |
| پــهلــــــوانـــــــان و جملـــــه ارحــاما | منــع كـــــــردندش از چنيـــن آهـــنگ | |
| در چــــنين رزمگــــــــــــاه خـونفــاما | كــــه روا نيست جـــــــان ز كف دادن | |
| ويــــن دليــــــــري، دليــــــري ِ خــاما | اين شجــاعت، شجــــاعتي عبث است | |
| نـــــــــــام من پــــــــايَــخستِ 2 اَقــداما | گفت بــــــــاري چســــــان تـــوانم ديد | |
| هــمچــو طشــت ِ فتــــــــــاده از بــاما | بــــــــانگِ لاقيــــدم فتــــد در شهـــــر | |
| زد پـــي جــــستجــــــو بـــــسي گـــاما | شـــد ســـوي رزمگــــــــاه دردل شب | |
| در طلب نـــــــــــامـــــــراد و دُژكــاما | يــــــافت پس تــــــــازيــانه را و نماند | |
| بر ســـــــــــــــرش ريــختنــد پــدراما3 | نـــــاگه از خيــــل ِ دشمنــــان، جمعي | |
| خيــــــر و شـــــر گشت در هم ادغاما | ســخت جــنگيد تــــــا دمي كه درست | |
| كشتــــه شــد پــهلــــــوان ســرانجــاما | ونــــــدر آويــــــزش« تــــــژاو ِ»4 پليد | |
| پــــهلـــــوانـــي ســتـــــــــوده انـــــداما | درره پــــــــاس نــــــام خود جــان داد | |
| نـــــــــام خــــــوش جـو، زبـام تا شاما | رو بخــوان شــــرح آن (بـــه شهنامه) | |
| آنــكــــــه شــد پـيــك ِ نـيـــك پـيــغــاما | گــشت اسطـــوره پهلـــــوان بهــــــرام | |
| كـــــــــــز جــوانــي گـــــرفت الـــهاما | گــــــــــرنــه دانـــــــا پسنـد بُـــد كاري | |
| قــصه اي مــــــاند نــغــــز و فـرزاما6 | ليــك از نـــــــامبــــــاره 5 مـــرد ِ دلير |
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تـــــــــا بــــداني كــه بــوده ايــراني |
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تــــــــا بــدين حـد غيــورّ و كـَرّاما7 |
| 1 - ضَرغام = شير | |
| 2 - پايخست = لگدكوب | |
| 3 - پدراما = خوشحال ، شادمان | |
| 4 - تژاو = پهلوان توراني در لشكر افراسياب | |
| 5 - نامباره = دوستار نام وبيزار از ننگ | |
| 6 - فرزام = سزاوار، مستحق ، لايق | |
| 7 - كـَرّام = بخشنده ، بزرگوار |