شكرخند شادي
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چـــرا چون خـــزان، دل، فکار آوريم؟ |
بيـــــا تـــــــا بـه شــــــادي بهــــارآوريم |
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| تـــبسّــم بــــه روي بــهــــــــــــار آوريم |
ســـزد گـــر چو بشکفتــــه گـــلهاي باغ |
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| تــهي کــــرده، شــــادي بــه بــار آوريم |
بـــهشت دل از لــــوث شــيطـــــــان غم |
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| پـــــريـچهـــــره اي در کنـــــــــارآوريم |
بيــــا چــون صنـــوبر ز گلهــــــاي شاد |
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| بـــه دل نــــــاوَک ِ جـــــانشکــار آوريم | نــشايــــــد کـــه از دســت صيــــــاد غم | |
| بــسي نـــقش زّريــنــــــه کـــــــارآوريم | ســـــزد گـــــربــه طــــاق و رواق ِ اميد | |
| فـزونتـــــــر کــه انـــدر شمــــــارآوريم | بــسي دلــخوشـيـهـــــاست در روزگــار | |
| بـيــــــا رو بــديـن غمــگســــــــارآوريم | طـــبيعت زمــــــا غمگســــــــاري کنــد | |
| شکــــــر خـنــده بــــر لب نثـــــارآوريم | گشـــــايـيم از چهـــــره آژنــگ و چيــن | |
| چـــــرا طبــع نــــــاسازگـــــــــار آوريم | درآويـــــــزش 1 نــــا خــوشيهــاي دهـر | |
| دريـــن ديـــــــــر ِ نـــــاپــــــايدار آوريم | چرا دور از احــوال خــوش، غم به دل | |
| ســــــزد گــــــردلي شــــــادخوار آوريم | بـه انـــدوهـخــــواري چـــه پـــوييـم راه | |
| دلــي هــمچو کـــــــوه اسـتـــــوار آوريم | گـَـــهِ ســـيــل ِ تـــوفــنـــدۀ حــــادثــــات | |
| همــــان بــه کــه دل کـــامگــــار آوريم | ز لبخنــد خــورشيـــد بــر کــوه ودشـت | |
| نــشـــــــــــاط دل از لالــــــه زار آوريم | بــه رامــشگـــــه بـــــوستــــانهـــا رويم | |
| ســـري خوش بــه دامـــــان يــار آوريم | شـــب وصــل در دامــــن مــــــــاهتـاب | |
| گــهي رخ ســوي آبــشـــــــــــــار آوريم | گــهي خــيمه بــــــر کــــوهسـاران زنيم | |
| مگــــــر چــــــاره بهـــــر خُمــار آوريم | بيـــــا تــــــا ايــــــاغي 2 زمـي پــر کنيم | |
| بــه ســــــاغــر مي خـوشگـــوار آوريم | زاشعـــــارمــستــي ده جـــــــانــفــــزاي | |
| بــه تـن نــشئه در پــــود و تــــار آوريم | زآواي تــــــــار و نــي و ضرب و ساز | |
| پــــــــراكنــده از هــــــــر ديــــار آوريم | سفـــــــرها گـــــزيــنيم و بـس خاطرات | |
| همــــــــان نــقش «اسفنــديـــــار» آوريم | به رويـــيـن تــني در نـــبــــرد حيــــات | |
| ز خـوشــبيني افــســون بــه كــار آوريم | ســـــــزد گـــــــر جهان را به بد ننگريم | |
| بــه مــــــــردانــگي افــتخــــــــار آوريم | بــه نــــــامـــردمي هـــــا نـــدوزيم چشم | |
| بــه لــطفش ســتـــــايش هـــــزار آوريم | بپـــوشيــم چشــم از بــــديهــــــاي دهــر | |
| دل از بــهــــر وي خواستگـــــار آوريم | بـــود آرزو دخــتــــــري مـــــــاهــروي | |
| روان را نــشــــــايــد كــه خــوار آوريم | ز دلـــمــــــردگــي روح گـــــــردد نژند | |
| يِِـك امــــــروز در دل قـــــــــرار آوريم | بــه امّيــــد فــــــرداي دلخـــواه و خوش | |
| ثــنــــــــــا بـــــــر در ِ كــردگــار آوريم | بــشكــــــــرانــۀ نـــعمــت ِ ايــــــــــزدي |
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به هــر فـن و هــر شيــوه بايد « اديب » |
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سخـن نغـــز و فــــــرزانــه وار آوريم |
| 1 - آويزش = نزاع ، برخورد قهر آميز |
| 2 - اياغ = ساغر مي |